धर्म दर्शन

जानिए नवरात्र क्यों मनाया जाता हैं ?....

नई दिल्ली  :  नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें‘। इन नौ रातों और दस दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा मनाया जाता है। नवरात्रि वर्ष में दो बार आता है।चैत्र, अश्विन, में धूम धाम से मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ रातों में तीन देवियों महाल़क्ष्मी,सरस्वती और दुर्गा के नौ रूपों की पूजा होती है। जिन्हें नवदुर्गा

नवरात्रि पर्व मनाने की ये है रोचक कथा....

नई दिल्ली  :  कहा जाता है कि दैत्य गुरु शुक्राचार्य के कहने पर दैत्यों ने घोर तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और वर मांगा कि उन्हें कोई पुरुष, जानवर और उनके शस्त्र न मार सकें। वरदान मिलते ही असुर अत्याचार करने लगे, तब देवताओं की रक्षा के लिए ब्रह्माजी ने वरदान का भेद बताते हुए बताया कि असुरों का नाश अब स्त्री शक्ति ही कर सकती है।ब्रह्माजी के निर्देश

नवरात्रि का व्रत है, तो जरूर बनाये कुट्टू के पकोड़े.....

नई दिल्ली  :  नवरात्रि का व्रत अधूरा है कुट्टू के पकौड़े के बिना। कुट्टू के आटे और उबले हुए आलू से तैयार ये पकौड़े न सिर्फ टेस्टी होते हैं बल्कि झटपट तैयार भी हो जाते हैं। नवरात्रि में बनाने के दौरान सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकती हैं। सामग्री: कुट्टू का आटा- 250 ग्राम, आलू- 4, हरी मिर्च- 2, अदरक- आधा चम्मच, सेंधा नमक- स्वादानुसार, नींबू का रस- आधा चम्मच,

जानें कब से शुरु हो रहे हैं नवरात्र, इस बार हाथी पर सवार होकर आएंगी देवी, घोड़े पर होंगी विदा....

नई दिल्ली  :  शारदीय नवरात्र में इस वर्ष देवी दुर्गा का आगमन हाथी पर और वापसी घोड़े पर होगी। देवी आगमन और गमन दोनों ही संकट की चेतावनी है। देवी का आगमन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर 29 सितंबर को होगा और विदाई दशमी तिथि पर आठ अक्तूबर को होगी। इस वर्ष नवरात्र पूरे नौ दिन का होगा।दुर्गासप्तशती के वर्णन के अनुसार देवी के दोनों ही वाहन प्राकृतिक आपदाओं के

गणपति विसर्जन को लेकर सोनाली बेंद्रे ने कही ये खास बात....

नई दिल्ली:    गणेश चतुर्थी का त्योहार मुंबई में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। लेकिन जिस तरह से इस त्योहार को मनाए जाने के दौरान प्रदूषण किया जाता है उसको लेकर फिल्म अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने ट्वीट करके नाराजगी जाहिर की है। सोनाली बेंद्र ने लोगों से अपील की है कि वह गणेश विसर्जन के बाद फैलने वाली गंदगी पर ध्यान दें। सोनाली बेंद्र ने गणेश विसर्जन की एक

श्राद्ध 2019: 13 सितंबर से 28 सितंबर तक, क्यों करें श्राद्ध ?

हरिद्वार: प्रत्येक मास की अमावस्या तिथि को श्राद्ध कर्म किया जा सकता है लेकिन भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक पूरा पखवाड़ा श्राद्ध कर्म करने का विधान है। अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के इस पर्व को श्राद्ध कहा जाता है। इस बार पितृ पक्ष 13 से 28 सितंबर तक चलेगा, जिसमें श्राद्ध कर्म किया जा सकता है। श्राद्ध सारिणी इस वर्ष श्राद्ध

श्राद्ध 2019:  ये 11 बातें दिलाएंगी आपको पितरों का आशीष

नई दिल्ली: धार्मिक शास्त्रों के अनुसार ‍पितृ पक्ष के सोलह दिन हमारे पूर्वज धरती पर आते हैं। मान्यता है कि हमारे द्वारा शुद्ध मन से किया गया तर्पण उन्हें तृप्ति प्रदान करता है और वे हमें पवित्र आशीष प्रदान करते हैं। * श्राद्ध करने के लिए तर्पण में दूध, तिल, कुशा, पुष्प, गंध मिश्रित जल से पितरों को तृप्त किया जाता है। * ब्राह्मणों को भोजन और पिंड दान से

श्राद्ध 2019: जानिए क्या होता है श्राद्ध का महत्व, क्यों किया जाता है पूर्वजो को याद

नई दिल्ली: इस बार पितृ पक्ष 13 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। पंचांग के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन माह की अमावस्या तक 15 दिन की विशेष अवधि में श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। श्राद्ध को पितृपक्ष और महालय के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में ऐसी मान्यता है पितृपक्ष के दिनों में हमारे पूर्वज जिनका देहान्त हो चुका है वे सभी पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप में

श्राद्ध 2019: पिडंदान करते समय भूल कर भी ना करें ये काम, नाराज होक सकते है आपके पूर्वज

नई दिल्ली: 15 दिन में 16 श्राद्ध होंगे, इसलिए पिंडदान करते समय पांच काम भूलकर भी नहीं करने चाहिए। ज्योतिषियों के अनुसार, ऐसा होने से पूर्वज नाराज हो जाते हैं। श्राद्ध की तिथियां पूर्णिमा का श्राद्ध-13 सितंबर, प्रतिपदा का श्राद्ध-14 सितंबर, द्वितीया का श्राद्ध-15 सितंबर, त़ृतीया का श्राद्ध-17 सितंबर, चतुर्थी का श्राद्ध-18 सितंबर, पंचमी का श्राद्ध-19 सितंबर, षष्ठी का श्राद्ध-20 सितंबर, सप्तमी का श्राद्ध-21 सितंबर, अष्टमी का श्राद्ध-22 सितंबर, नवमी

श्राद्ध 2019: इस दिन किया श्राद्ध तो पूरा नहीं होेगा तर्पण, जानिए कारण

नई दिल्ली: पितरों को याद करने और उनका तर्पण करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए श्राद्ध के लिए 15 दिन का समय तय किया गया है। पितृ पक्ष भाद्रपद मास की पूर्णिमा और आश्विन माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं। इस साल आश्विन प्रतिपदा यानी 13 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहा है। इस बार 14 को प्रतिपदा और 15 सितम्बर को द्वितीया का श्राद्ध होगा