baisakhi 2018

जानिए क्या है क्यों मनाते हैं बैसाखी का ये पर्व...

अमृतसर: देश के अलग-अलग जगहों पर इसे अलग नामों से मनाया जाता है-जैसे असम में बिहू, बंगाल में नबा वर्षा, केरल में पूरम विशु के नाम से लोग इसे मनाते हैं. पर क्या आपको यह पता है कि इतने बड़े स्तर पर देशभर में बैसाखी आखिर क्यों मनाते हैं लोग. बैसाखी, दरअसल सिख धर्म की स्थापना और फसल पकने के प्र‍तीक के रूप में मनाई जाती है. इस महीने खरीफ

बैसाखी मेला: केसी कालेज में हुआ बैसाखी मेला शुरु...

 केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूशन नवांशहर में  शुक्रवार को  बैसाखी मेला 2018 शुरु हुआ। मेले की शुरुआत केसी ग्रुप के शिक्षा विभाग के सीईओ मेजर जनरल जीके चोपड़ा (वीएसएम) ने की, जबकि उनके साथ प्रिं. डा. शैली रेखी शर्मा, प्रिं. बलजीत कौर आदि मौजूद रहे। मेले में केसी ग्रुप के कालेज, स्कूल्स के स्टाफ व बाहर से आए दुकानदारों द्वारा चाय, काफी, जलेबी, छोले कुलचे, पिक पीजा, बर्फ का गोला- लच्छे,

बैसाखी: नए साल की होती है शुरुआत, फसल कटने पर मनाया जाता है ये उत्सव

हरियाणा: हर फसल कटने के वक्त बैसाखी का त्यौहार मनाया जाता है। ये बैशाख मास में फसल काटने के बाद नए साल की शुरुआत के तौर पर मनाया जाने वाला पर्व बैसाखी है। जो इस साल 14 अप्रैल यानी शनिवार को मनाया जाएगा। ये त्योहार खास तौर से खेती से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि बैसाखी के बाद ही गेहूं की फसल की कटाई शुरू होती है। सिखों

फसल तैयार होने और खालसा पंथ की स्थापना की खुशी का पर्व है बैसाखी

पंजाब: सवाल है कि बैसाखी का त्योहार इतना निश्चित क्यों है? हर साल 13 अप्रैल (ज्यादातर) को और कभी-कभी 14 अप्रैल को होता है। अधिकांश पर्व-त्योहार मौसम, मौसमी फसल और उनसे जुड़ी गतिविधियों से ही संबंधित हैं। भारत में महीनों के नाम नक्षत्रों पर रखे गए हैं। बैसाखी के समय आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। विशाखा नक्षत्र पूर्णिमा में होने के कारण इस माह को वैशाख कहते हैं। इस

ऐसे दे अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को बैशाखी की शुभकामनाएं...

बैसाखी 2018: इस साल 14 अप्रैल को देशभर में बैसाखी का त्योहार पूरे धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। सिख समुदाय के लिए खास महत्व रखने वाला यह त्योहार हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन सिखों के 10वें गुरू श्री गुरू गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस वजह से यह त्योहार सिख समुदाय के लोग बड़े हर्ष और उल्लास के

बैसाखी 2018: जानिए कैसा करे सेलिब्रेट बैसाखी का त्योहार...

बैसाखी 2018: इस साल बैसाखी का पर्व शनिवार 14 अप्रैल को मनाया जा रहा है। यह पर्व पंजाब और हरियाणा के रबी की फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियों के रूप में मनाते हैं। इसीलिए बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह पर्व रबी की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक माना जाता है। यह दिन को सिख समुदाय के लिए बहुत खास होता

बैसाखी 2018: आइये जाने की स्नान से होगा क्या लाभ...

पंजाब: बैसाखी पंजाब के देसी महीने का नाम है। इसे पंजाब में बैसाख भी कहा जाता है। श्रद्धालु गुरुद्वारों में नतमस्तक होकर खुशी मनाते हैं। 13 अप्रैल 1699 के दिन सिख पंथ के 10 वें गुरू श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस दिन को मनाने का कारण मौसम में बदलाव भी है। अप्रैल के माह में गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है।

ओ जट्टा जिवे आई रुत बैसाखी दी...

 राजपुरा: जिथे रुत बैसाखी दी लै के आऊंदी मस्त बहारां….पा भंगड़े नचदे ने थां-थां गबरू ते मुटियारां…कनकां दी मुक गई राखी, ओ जट्टा आई बैसाखी। आज बैशाखी है। इस फेस्टिवल को सेलिब्रेट करने के लिए दिल्ली के होटलों से लेकर रेस्तरां वालों ने तैयारी कर ली है। आज के दिन यहां पर स्पेशल फूड सर्व किया जाएगा। साथ ही, जश्न के लिए ढोल नगाड़ों का भी इंतजाम होगा। गुरुद्वारों में भी पाठ-कीर्तन और

जानिए धार्मिक और सामाजिक महत्व-बैसाखी 2018

चंडीगड़: कल यानी 14 अप्रैल शनिवार को बैसाखी का त्यौहार पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। खासतौर पर पंजाब प्रांत में इसकी धूम रहेगी। बैसाखी के दिन सूर्य की संक्रांति होती है। इसका अर्थ है कि इस दिन सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति की तरह ही बैसाख माह की इस संक्रांति का विशेष धार्मिक और सामाजिक महत्व होता है। धार्मिक महत्व के

जानिए बैसाखी पर स्नान व दान का शुभ मुहूर्त...

दिल्ली: फसल कटने के बाद नए साल की शुरुआत के तौर पर मनाया जाता है बैसाखी का पर्व। वैसे तो समूचे देश में ही इसे अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। मगर उत्‍तर भारत और विशेषकर पंजाब में इसकी काफी धूम रहती है। इस बार बैसाखी 14 अप्रैल को शनिवार के दिन मनाया जाएगा।  बैसाख संक्रांति में सूर्य मेष राशि में सुबह 08:10 पर प्रवेश करेंगे। बैसाख संक्रांति 14 अप्रैल 2018, शनिवार को