Ganesh Chaturthi History

Ganesh Chaturthi History

कम लोग ही जानते है श्री गणेश चतुर्थी से जुड़ी ये बाते....

नई दिल्ली  :  भगवान शिव और मां पार्वती की संतान भगवान गणेश का स्‍वरूप अद्भुत है। उनकी नाक हाथी की सूंड की तरह और बड़े-बड़े कान हैं। भगवान गणेश को सफलता एवं मुसीबतों तथा दुश्‍मनों का संहारक माना जाता है। उन्‍हें शिक्षा, ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि का कारक भी माना जाता है। यहां तक कि भगवान गणेश को हिंदू धर्म के पांच प्रमुख देवी-देवताओं (ब्रह्म, विष्‍णु, महेश और मां दुर्गा)

ब्रज की धरा पर घर घर पधारेंगे गजानन, ऐसे मिली गणेश उत्‍सव को यहां भव्‍यता....

आगरा:   बुद्धिविनायक भगवान गणपति के पूजन के लिए मंदिरों में मनाया जाने वाला गणेशोत्सव अब गली-गली, मुहल्ले-मुहल्ले पहुंच गया है। पूरा शहर 10 दिन तक गणेशमय हो जाता है, जगह-जगह पंडाल लगा कर पूजे जाते हैैं विघ्न विनाशक। प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएं होती हैैं।करीब तीन दशक पहले तक यह गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई जाती थी। घरों में मिट्टी के गणपति महिलाएं स्वयं बनाती थीं, उनका पूजन किया

आप जानते हैं गणेश जी के शरीर का रंग हरा और लाल है, जानें गणेश जी से जुड़े दिलचस्प तथ्य....

नई दिल्ली  :  भगवान शिव और मां पार्वती की संतान भगवान गणेश का स्‍वरूप अद्भुत है। उनकी नाक हाथी की सूंड की तरह और बड़े-बड़े कान हैं। भगवान गणेश को सफलता एवं मुसीबतों तथा दुश्‍मनों का संहारक माना जाता है। उन्‍हें शिक्षा, ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि का कारक भी माना जाता है। यहां तक कि भगवान गणेश को हिंदू धर्म के पांच प्रमुख देवी-देवताओं (ब्रह्म, विष्‍णु, महेश और मां दुर्गा)

गणपति बप्‍पा के हर अंग में छिपा है जीवन जीने की कला का रहस्य, आइए जानते हैं ये रहस्य....

बेंगलुरु :   श्रीगणेश की आराधना थोड़ी देर के लिए ही यदि समर्पित भाव से मन लगाकर कर ली जाए तो वह शीघ्र प्रसन्न होकर भक्तों को मनमांगा वरदान देते हैं। श्रीगणेश धरती पर कई स्वरूपों में विराजमान है और कई जगहों पर गणपति की सिद्ध प्रतिमाएं है, जहां पर भक्तों की झोली खुशियों से भर जाती है और उनकी सारी मुश्किलें हल हो जाती है। क्या आपको पता है कि

गणपति के जन्म का उत्सव है गणेश चतुर्थी, ऐसे हुआ था विनायक का जन्म.....

नई दिल्ली:  भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्मदिन गणेश चतुर्थी के नाम से मनाया जाता है। इस दिन माता पार्वती के घर उनके छोटे पुत्र गणेश का आगमन हुआ था, इसकी खुशी में पूरे देश में 9 दिनों तक गणेशोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस दौरान भगवान गणेश के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन दिनों में पूजा करने से भगवान

क्या आप जानते हैं गणेश महोत्सव का इतिहास....

नई दिल्ली  :  गणेश चतुर्थी के त्योहार पर पूजा प्रारंभ होने की सही तारीख किसी को ज्ञात नहीं है, हालांकि इतिहास के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि 1630-1680 के दौरान गणेश चतुर्थी उत्सव शिवाजी (मराठा साम्राज्य के संस्थापक) के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था।शिवाजी के समय, यह गणेशोत्सव उनके साम्राज्य के कुलदेवता के रूप में नियमित रूप से मनाना शुरू किया गया

जानिए गणेश जी का प्रिय भोग लड्डू की उत्पत्ति की कहानी....

नई दिल्ली  :  गणेश चतुर्थी का पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है, कोई भी खुशी का मौका हो, घर में धार्मिक अनुष्ठान हों या शादी-ब्याह का अवसर हो, एक मिठाई ऐसी है जिसका जिक्र किए बिना कोई नहीं रहता और वह है लड्डू। विघ्नविनाशक, सन्मतिदायक गणपति जी को भी लड्डू का भोग अत्यंत प्रिय है। लड्डू शब्द की उत्पत्ति संस्कृत शब्द लड्डू का से हुई है, जिसका मतलब

जानिए क्या है गाणपत्य संप्रदाय, गणेश चतुर्थी पर विशेष.....

नई दिल्ली  :  हिंदू धर्म की सभी विचारधारा या संप्रदाय वेद से निकले हैं। वेदों में ईश्वर, परमेश्वर या ब्रह्म को ही सर्वोच्च शक्ति माना गया है। सदाशिव, दुर्गा, ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सरस्वती, लक्ष्मी, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय, भैरव, काली आदि सभी उस सर्वोच्च शक्ति का ही ध्यान करते हैं। सभी संप्रदाय मूल में उसी सर्वोच्च शक्ति के बारे में बताते हैं।हिन्दू धर्म में मूलत: वैदिक, शैव, वैष्णव, शाक्त, गाणपत्य, कौमारम,

गणेश चतुर्थी 2019:जानिए इतिहास श्री गणेश महोत्सव की शुरुआत कब, कैसे और कहां हुई?

नई दिल्ली:गणेश चतुर्थी के पर्व पर पूजा प्रारंभ होने की सही तारीख किसी को ज्ञात नहीं है, हालांकि इतिहास के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि गणेश चतुर्थी 1630-1680 के दौरान छत्रपति शिवाजी (मराठा साम्राज्य के संस्थापक) के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था। शिवाजी के समय, यह गणेशोत्सव उनके साम्राज्य के कुलदेवता के रूप में नियमित रूप से मनाना शुरू किया गया था।पेशवाओं

गणेश चतुर्थी 2019:क्या आप जानते हैं गणेश महोत्सव का इतिहास

नई दिल्ली:गणेश चतुर्थी के त्योहार पर पूजा प्रारंभ होने की सही तारीख किसी को ज्ञात नहीं है, हालांकि इतिहास के अनुसार, यह अनुमान लगाया गया है कि 1630-1680 के दौरान गणेश चतुर्थी उत्सव शिवाजी (मराठा साम्राज्य के संस्थापक) के समय में एक सार्वजनिक समारोह के रूप में मनाया जाता था। शिवाजी के समय, यह गणेशोत्सव उनके साम्राज्य के कुलदेवता के रूप में नियमित रूप से मनाना शुरू किया गया था।