फैशन फैक्ट : जानिए कैसे ट्रैंड में आ गईं हाई हील्‍स

फैशन फैक्ट : जानिए कैसे ट्रैंड में आ गईं हाई हील्‍स

नई दिल्ली : क्रिश्चियन लाउबाउटिन, एक मशहूर डिजाइनर के शब्‍दों में कहा जाएं तो, ”हाई हील्‍स, दर्द के साथ खुशी देती हैं।” ये डिजाइनर गज़ब के प्रतिभाशाली व्‍यक्ति थे, इन्‍होने फुटवियर की दुनिया में एक ऐसी डिजाइन को बनाया, जो आज के समय में हर लड़की और महिला की वार्डरोब की जान है। किसी भी फीमेल का वार्डरोब, रेड-सोल्‍ड लाउबाउटिन के बगैर अधूरा है। हाई-हील्‍ड फुटवियर को आमतौर की भाषा में हील वाली चप्‍पल या हाई हील कहा जाता है। किसी भी स्‍टाइलिश ड्रेस को हील के साथ पहनना ही परफेक्‍ट ड्रेसिंग सेंस कहलाता है। हील 2 से 5 इंच तक की होती है यानि 5.1 से 12.7 सेमी. तक की।

इन्‍हे तीन कैटेगरी में रखा गया है: लो हील्‍स, मिड हील्‍स और हाई हील्‍स। हील पहनने से ड्रेस का लुक ग्‍लैमरस आता है और आपके पैरों का लुक भी स्‍टाइलिश हो जाता है। इससे ऊंचे आने वाली फुटवियर हील नहीं बल्कि ज्‍वैलरी फॉर फीट के नाम से जाने जाते हैं जिन्‍हे किसी विशेष उद्देश्‍य के लिए इस्‍तेमाल में लाया जाता है। क्‍या आप हील के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं? क्‍या हमारे पूर्वकालों में हील का चलन था? जी हां, मध्‍यकालीन युग में कई लोग लकड़ी से निर्मित सैंडल पहनते थे। एलिजाबेथ सेम्‍मेलहक़, टोरंटो बाटा शू म्‍यूजियम की क्‍यूरेटर, ने सबसे पहले हील के इतिहास पर प्रकाश पड़वाया|

जब पूर्व में फारसी घुड़सवारी के दौरान इन्‍हे पहनते थे ताकि वह घोड़े पर सही तरीके से बैठ सकें और उस पर उनका अच्‍छा नियंत्रण रहें। इनका कहना है कि ये फुटवियर, पार्सिया से 9वीं सदी के सेरेमिक कटोरे पर दर्शाया गया है। दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद से, हाई हील के फैशन ने जोर पकड़ लिया और यह बहुत प्रसिद्ध फैशन आईकॉन बन गया। 21वीं सदी तक आते-आते हाई हील, हर घर में, हर औरत में वॉर्डरोब तक पहुंच गई। अब तो इनमें कई तरह की वैरायटी भी आती है- कोन हील, किट्टेन हील, प्रिज्‍म हील, पप्‍पी हील, स्‍पूल हील, स्‍टीललेज और वेजे़स।

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