मानसून में बढ़ सकता है दमा का खतरा, घर में भी रहें सम्‍भलकर…

मानसून में बढ़ सकता है दमा का खतरा, घर में भी रहें सम्‍भलकर...

नई दिल्ली :  गर्मी की तपन के बाद मानसून लोगों के ल‍िए राहत की बौंछारें साथ लेकर आता है। लेकिन ये मौसम अस्‍थमा मरीजों के ल‍िए दमे के अटैक का खतरा बढ़ा देता है। हालांकि वातावरण में मौजूद नमी और तापमान अस्थमा के मरीज़ों को कई प्रकार से प्रभवित करता है। इस मौसम में अतिरिक्‍त सावधानी बरतकर आप इस समस्‍या से बचाव कर सकते हैं। आइए जानें अस्थमा के रोगी इस मौसम में कौन सी सावधानियां पहले से बरतनी चाह‍िए।सांस लेने में समस्या होना। बच्चों में होने वाली खांसी भी समस्या बढ़ा सकती है।

बुखार के साथ थकान का होना। सीने में जकड़न महसूस होना।ज्या‍दा गर्म और ज्यादा नम वातावरण से बचें क्योंकि ऐसे में मोल्ड स्पोर्स के फैलने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। आंधी और तूफान के समय घर से बाहर ना निकलें । अस्थमा को नियंत्रित रखें और अपनी दवाएं हमेशा साथ रखें । अगर आपका बच्चा अस्थमैटिक है तो उसके दोस्तों व अध्यापक को बता दें कि अटैक की स्थिति में क्या करें। हो सके तो अपने पास स्कार्फ रखें जिससे आप हवा के साथ आने वाले पालेन से बच सें।

घर के अंदर किसी प्रकार के धुंए से बचें और रात को खिड़कियां खोलकर सोने के बजाय ए सी चला दें ।कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखकर भी मानसून में अस्‍थमा के रोग को नियंत्रण में रखा जा सकता है। दमा की दवा का नियमित सेवन करना चाहिए। अस्थमा से पीड़ित अधिकांश लोग दवाएं (सामान्यत: यह एक इन्हेल करने वाली कोर्टिकोस्टरॉयड है) लेते हैं, क्योंकि यह सांस लेने की प्रक्रिया में प्रॉब्लम खड़ी करती है।

स्टडीज से पता चला है कि नियमित रूप से दवाओं के सेवन से दमा का खतरा कम हो जाता है।नमी और उमस भरे क्षेत्र को नियमित रूप से सुखाएं। उमस खत्म करने वाले इक्यूपमेंट्स के प्रयोग से ह्यूमिटी को 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच रखें। यदि संभव हो तो एसी का उपयोग करें। हीटर्स और एयर कंडिशनर्स के फिल्टर्स को नियमित रूप से बदलें।

मानसून के दौरान पौधों को बेडरूम से बाहर रखें। पेंटिंग करते समय पेंट में फंगल खत्म करने वाले केमिकल का उपयोग करें, जिससे फंगल को बढ़ने से रोका जा सकता है। दिखाई देने वाले फंगल को साफ करें और ब्लीच तथा डिटर्जेंट जैसे पदार्थों से युक्त क्लीनिंग सोल्युशंस का उपयोग करें।

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