सेब से शरीर में बनने वाला सायनाइड हो सकता है मौत का कारण …

सेब से शरीर में बनने वाला सायनाइड  हो  सकता है मौत का कारण ...

नई दिल्ली  : सेब एक ऐसा फल है जिसे इंसानी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही गुणकारी माना जाता है। यहां तक की डाक्टर भी इसे खाने की सलाह देते है। इसे रोजाना खाने से हमे कई तरह पोषक तत्व मिलते है। मगर शायद आप इस बात से पूरी तरह से अंजान है कि इसे खाने से गंभीर बीमारियां हो सकती है। दरअसल अगर कोई शख्स सेब में मौजूद बीजों का सेवन कर लेता है तो यह उसके स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हो सकता है।

इसका कारण इन बीजों में मौजूद अमिगडलिन नामक तत्व होता है जो जब पेट में अंदर पाए जाने वाले एंजाइम से मिलता है तो यह साइनाइड का निर्माण करते है। यह सायनाइड किसी भी इंसान को बीमार कर सकता है। यहां तक कि अगर शरीर में इसकी मात्रा अधिक हो जाए तो इसके प्रभाव से मौत भी हो सकती है। अमिगडलिन नामक यह घातक तत्व सेब के अलावा उन अन्य फलों में भी पाया जाता है, जिनके अंदर छोटे बीज होतै है।

सायनाइड किसी इंसान के लिए इस कदर हानिकारक हो सकता है कि अगर की व्यक्ति एक सेब के बीजों को पीस कर खा लेता है तो उसकी मौत भी हो सकती है। बीजो में पाई जाने वाली इसकी मात्रा के बताए तो 1 ग्राम बीजों में 0.06 ml से 0.24 ml तक अमिगडलिन पाया जाता है। इंसानो के लिए 0.5 – 0.8 की मात्रा काफी खतरनाक साबित होती है।

यहां तक की यह मात्रा मौत का कारण भी बन सकता है।आपको बता दें कि अगर कभी आप गलती से सेब के बीच निगल भी गए हैं तो कोई खतरे की बात नही है, बस आपने उन्हें दांतो से चबाया न हो। सेब को खाने का सही तरीका यही है कि आप सेब को काट कर खाएं और काटते समय उसके सारे बीज अच्छे से निकाल दें।

अगर हमारे शरीर के अंदर सायनाइड पैदा होता है तो यह सबसे पहले हमारे श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है जिससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। अगर सही समय पर उचित उपचार न लिया जाए तो इससे मौत भी हो सकती है।इस खतरनाक तत्व का प्रभाव हमारे दिल पर भी पड़ता है। यह हमारे दिल की धड़कन व ब्लड प्रैशर की रफ्तार को समान्य से कहीं ज्यादा बढ़ा देता है।

सायनाइड अगर एक बार शरीर में पैदा हो जाए तो यह धीरे धीरे हमारे दिमाग तक उसकी आक्सीजन की सप्लाई को बंद कर देता है। इसके कारण आप ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति के शिकार बनते हो। ऐसी स्थिति में मौक की संभावना काफी अधिक रहती है।इंसानी शरीर में सायनाइड की उपस्थिति धीरे धीरे शरीर की उर्जा को खत्म कर देती है जिससे शरीर में कमजोरी आ जाती है।

इस कमजोरी के कारण आप दिमागी रुप से भी काम नही ले पाते और आपको चक्कर आने लगते है।यह घातक तत्व इंसान के पूरे सिस्टम पर प्रभाव डालता है। इसके कारण आपको उल्टी आदि भी आती है और यह माइग्रेन का कारण भी बन सकता है।

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